स्वस्थ मधुमक्खी बस्तियों के लिए रानी को चाहिए स्वच्छंद संभोग

मधुमक्खियों की घटती आबादी को रोकने के लिए किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि मधुमक्खियों की बस्ती के स्वस्थ होने में उनकी महारानी का बेहद स्वच्छंद संभोगी होना जरूरी होता है।
 अमेरिका के मैसेचुसेट्स में वेलेसली कॉलेज के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि महारानी मधुमक्खी के स्वच्छद संभोगी व्यवहार से अनुवांशिक तौर पर विविध कामगार मधुमक्खियों की आबादी तैयार होती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे उनकी बस्तियों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। उनका कहना है कि इस खोज का इस्तेमाल मधुमक्खियों की कम होती संख्या को रोकने के लिए किया जा सकता है। मधुमक्खियां दुनियाभर में 400 से ज्यादा फसलों का परागण करती हैं और हमारे भोजन के एक तिहाई भाग में योगदान देती हैं।

परिवार की रोगों से रक्षा करता है शीतलाष्टमी व्रत

शीतलाष्टमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनायी जाती है। इसमें शीतला माता का व्रत और पूजन किया जाता है। शीतला अष्टमी व्रत को करने से व्यक्ति के सारे परिवार में दाह ज्वर, पीत ज्वर, दुर्गन्ध से युक्त फोड़े, आंखों के सारे रोग, माता की फुंसियों के निशान तथा शीतलाजनित सारे दोष ठीक हो जाते हैं।
इस दिन प्रात:काल स्नान आदि करके श्रद्धा-भक्ति और विधि सहित शीतला देवी की पूजा की जाती है। इसके बाद एक दिन पहले तैयार किए बासी खाने का भोग लगाया जाता है। भोग लगाकर आनंद-मंगल की कामना की जाती है। यह दिन महिलाओं के विश्राम का भी दिन कहा जाता है, क्योंकि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। इस व्रत को रखने से शीतला देवी प्रसन्न होती हैं।
शीतला माता की कथा
एक गांव में एक स्त्री रहती थी। वह बसौड़े अर्थात् शीतलाष्टमी की पूजा करती और ठंडा भोजन लेती थी। गांव में यह स्त्री ही केवल व्रत रखती थी। एक समय गांव में आग लग गई, जिसमें उस स्त्री का घर छोड़कर बाकी सबके सब घर जल गए। इससे सबको बहुत आश्चर्य हुआ। गांव के सब लोगों ने उस स्त्री से इस चमत्कार का राज पूछा। उस स्त्री ने गांव के लोगों से कहा कि मैं तो बसौड़ा के दिन ठंडा भोजन लेती हूं और शीतला माता का पूजन करती हूं। आप लोग यह कार्य तो करते नहीं हैं। इससे मेरा घर नहीं जला और आप सबके घर जल गए। तब से बसौड़े के दिन सारे गांव में शीतला माता का पूजन आरंभ हो गया।
शीतला स्तोत्र में शीतला का जो स्वरूप बतलाया है, वह माता के रोगी के लिए बहुत मददगार है। इसमें कहा गया है कि शीतला दिगम्बरा हैं, गर्दभ पर सवार रहती हैं। सूप (छाज) झाड़ (माजर्नी) और नीम के पत्तों से अलंकृत हैं और हाथ में शीतल जलघट उठाए हुए हैं।
आमतौर में शीतला रोग के आक्रमण के समय रोगी दाह से निरंतर पीड़ित रहता है। अत: इसे शीतलता की बहुत आवश्यकता रहती है। गर्दभ पिण्डी (गधे की लीद) की गंध से फोड़ों की पीड़ा कम हो जाती है। साफ-सफाई के काम आने वाली वस्तु जैसे झाड़ लगाने से रोग में वृद्धि होती है। अत: इन कार्यों को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। केवल सूप और झाड़ रोगी के पास रख दें। नीम के पत्तों से शीतला के फोड़े सड़ते नहीं हैं और जलघट भी उसके पास रखना आवश्यक है।
इस व्रत में रसोई की दीवार पर हाथ की 5 अंगुली घी से लगाई जाती हैं। इस पर रोली तथा चावल लगाकर देवी माता के गीत गाते हैं। इसके साथ शीतला स्तोत्र तथा कहानी सुनी जाती है। रात में जोत भी जलाई जाती है। एक थाली में बासी भोजन रखकर परिवार के सारे सदस्यों का हाथ लगाकर शीतला माता के मंदिर में चढ़ाते हैं। 
इस दिन चौराहे पर भी जल डालकर पूजा करनी चाहिए। फिर बायना निकालकर इस पर कुछ रुपए रखकर अपनी सासजी को चरण छूकर दें। उपरांत किसी वृद्ध को भी भोजन तथा दक्षिणा दें। 

स्रोत

दुनिया के पांच सबसे ताकतवर देश

इन देशों की जीडीपी भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में भारत का स्थान 10वां। भारत का सकल घरेलू उत्पाद 1843 अरब डॉलर है। आर्थिक महाशक्तियों के मामले में पहले स्थान पर हैं—

संयुक्त राज्य अमेरिका- यूएसए की जी़डीपी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है इसका आकार 15,060 अरब डॉलर है। अमेरिका दुनिया की प्रमुख
महाशक्ति के स्थान पर काफी समय से काबिज है।

चीन- एशिया के सबसे बड़े देश चीन ने हाल ही में जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति होने का गौरव हासिल किया है चीन की
जीडीपी 6,989 अरब डॉलर की है।

जापान- चीन का पड़ोसी देश जापान काफी समय तक दुनिया की दूसरी बड़ी आर्थिक ताकत रहा है। लेकिन अब यह तीसरे स्थान पर है जापान की सकल घरेलू उत्पाद 5,855 अरब डॉलर है।

जर्मनी- नॉमिनल जीडीपी के मामले में जर्मनी चौथा सबसे बड़ा राष्ट्र है। इसकी जी़डीपी का आकार 3,629 अरब डॉलर है।

फ्रांस- यह दूसरा यूरोपीय देश है जो टॉप फाइव आर्थिक ताकतों में जगह बनाए हुए है। फ्रांस की जी़डीपी 2808 अरब डॉलर की है। 

जलती चिता से उतार लिया श्रीकृष्ण का शव

रायपुर।छत्तीसगढ़ राज्य के चंपा-जांजगीर जिले में आने वाले शिवरी नारायण मंदिर को गुप्त तीर्थ स्थल भी कहा जाता है क्योंकि यहां भगवान नीलमाधव का नारायणी रूप गुप्तरूप से विराजमान हैं। इसके पीछे की कहानी भी बड़ी रोचक है। प्राचीनकाल में शिवरीनारायण श्रीसिंदूर गिरि का क्षेत्र था, जहां घने जंगल होते थे और इस क्षेत्र में शबर जाति का शासन हुआ करता था।
 
ऐसी मान्यता है द्वापरयुग के अंतिम चरण में कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे। कृष्ण को श्रापवश एक जरा नाम के शबर का तीर लगा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। वैदिक रीति से श्रीकृष्ण का दाह संस्कार किया गया, लेकिन उनका मृत शरीर नहीं जला।
 
इस कारण उनका मृत शरीर चिता से निकालकर समुद्र में प्रवाहित किया गया। इधर पश्चाताप की आग में जल रहे शबर को जब कृष्ण के मृत शरीर का समुद्र में प्रवाहित होने का समाचार मिला है तो वह तुरंत जाकर शरीर को समुद्र में से निकाल लाया।
 
इसी श्रीसिंदूरगिरि क्षेत्र में एक जलस्त्रोत के किनारे बांस के पेड़ के नीचे रखकर उनकी पूजा और तंत्र साधना करने लगता है। उनका मृत शरीर आगे चलकर नील माधव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वहीं इंद्रभूति नामक तांत्रिक नीलमाधव की मूर्ति को वहां से उठाकर ले जाता है और संभल पहाड़ी की गुफा में ले जाकर तंत्र साधना करने लगता है।
 
इधर, जरा शबर अपने नीलमाधव को न पाकर खूब रोता है और खाना पीना बंद कर देता है। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नीलमाधव अपने नारायणी रूप के दर्शन देकर गुप्त रूप से यहां विराजमान होने का वरदान देते हैं। तब से भगवान नारायण इस मंदिर में विराजमान हैं, जो भक्त हर साल माघपूर्णिमा को भगवान नारायण के दर्शन करता है। वह मोक्ष पाकर स्वर्ग जाता है।
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दुनिया का अनोखा भूतहा कस्बा


अगर आप दिशा-निर्देश के लिए अपने स्मार्टफोन पर निर्भर रहते हैं और कैलिफोर्निया के डार्विन घूमने जाना चाहते हैं तो मैप और कंपास के साथ तैयार रहें क्योंकि स्मार्टफोन यहां शायद ही काम करे।

यह दूरदराज कस्बा डेथ वैली नेशनल पार्क के नज़दीक रेगिस्तानी पहाड़ों में स्थित है। यहां इंटरनेट की स्पीड काफी कम है और मोबाइल के सिग्नल भी कम ही काम करते हैं।

जनगणना विभाग के अनुसार इस कस्बे की कुल आबादी 43 है और यहां कोई भी 18 वर्ष की उम्र से कम नहीं है।

तस्वीरों में देखिए इस वीरान कस्बे की भूतहा हालत....
 
 

Call Centre


Actual call centre conversations

Customer:     'I've been ringing 0800 2100 for two days and can't get through to enquiries, can you help?'.
Operator:     'Where did you get that number from, sir?'.
Customer:     'It was on the door to the Travel Centre'.
Operator:     'Sir, they are our opening hours'.
 

Obscure Conspiracy Theories


5. Babylon
Some Rastafarians maintain that a white racist patriarchy (“Babylon”) controls the world in order to oppress the African race. They believe that Emperor Haile Selassie of Ethiopia did not die when it was reported in 1975, and that the racist, white media (again, “Babylon”) propagated that rumour in order to squash the Rastafari Movement and its message of overthrowing Babylon. Other Rastafarians, however, believe in peace and unity, and interpret Babylon as a metaphor for the established “system” that oppresses (or “downpresses,” in Rasta terminology) groups such as Africans and the world’s poor.

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