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राशि और सैक्स - मकर राशि

राशि और सैक्स - मकर राशि
Sign & Sex - Capricorn
सौरमण्डल में अपने मगरमच्छ आकार के कारण इस राशि का नामकरण ‘मकर’ है। स्वामी ग्रह शनि, अंक 8 है। हस्तरेखा के अनुसार तर्जनी के तल में स्थित है। इसका माह माघ (जनवरी-फरवरी), चर राशि, तत्त्व पृथ्वी, पृष्ठोदय उदय, दिशा उत्तर, लिंग स्त्री, जाति शूद्र, तमोगुणी, रंग नीला काला, प्रकृति रात, ऋतु शिशिर, रत्न नीलम, आकार छड़ लगी खिड़की के समान, निवास जल, शरीर में अंग पैर तथा इसका केवल प्रथम भाग चतुष्पद है।इस राशि के जातक छरहरे, लम्बे, साधारण सुन्दर होते हैं। इस राशि के पुरूष की इन्द्रिय बेलनाकार होती है और स्त्री अंग खिड़कीनुमा, उसमें कई दरारें दीखती हैं। भगोष्ठ फेलने पर एक दरार दीखेगी, किन्तु सामान्य दशा में कई छिद्र दीखते हैं। स्तन बड़े और लटके होते हैं, किन्तु नितम्ब अत्यन्त उच्च और वृद्धावस्था तक कसावट भरे होते हैं। इस राशि की कामोत्तेजना का स्थल पैरों में है। विशेष रूप से पिंडलियों में, उनको कंधे पर उठाकर रखते ही कम्पन के साथ ही कामोत्तेजना बढ़ जाती है और यह स्खलित हो जाता है। जाति से शूद्र और केवल प्रथम भाग चतुष्पद है, अतः इसे कंधे पर पैर रखे जाने वाला आसन ही सबसे प्रिय है। तत्त्व इसका पृथ्वी तथा निवास जल या वन होने से मैथुन शांत, किन्तु भरपूर होता है। विपरीत पक्ष को यह पूरा निगल जाता है। उत्तर की ओर मुख करके क्रिया में विशेष सुख पाता है। इसका मैथुन सारे शरीर में हलचल मचा देने वाला तथा पानी में मगरमच्छ के भागने की ‘छप-छप’ की ध्वनि से युक्त होता है। यह पृष्ठ भाग से सम्भोग करना पसन्द करता है। उनकी आंखों में चमक भी होती है। इस राशि के जातकों का व्यवहार बड़ा रहस्यमय होता है। प्रेम के मामले में प्रायः उदासीन रहते हैं। इनका प्यार पाने के लिये निरन्तर प्रयास करना पड़ता है। चर स्वभाव के कारण चंचलता होती है, और रात्रि में मैथुन करना विशेष प्रिय है। बिना खिड़की वाले कमरे या स्थान में मैथुन करतें समय इनको पूर्ण तृप्ति नहीं मिलती है। इस राशि का जातक अत्यन्त कामुक होता है। अपनी पत्नी के अलावा यह परायी स्त्री से अवश्य सम्बन्ध रखता है। इस राशि की स्त्री में कामोत्तेजना होती है, कामुक होती हैं किन्तु परपुरूष से सम्पर्क में कठिनता से आती है। इस राशि की स्त्री को सन्तुष्ट करने में पति को पसीना आ जाता है। जाति शूद्र होने से इसका मैथुन बड़ा अश्लील होता है। साफ-सफाई तो इसको पसन्द है, किन्तु इसमें भी घिनौनापन ज्यादा होता है। इस राशि का जातक मैथुन से पूर्व अपनी पत्नी को बेहद तंग करता है। कभी हाथ तो कभी मुख का प्रयोग करने पर विवश कर देता है। श्रृगांरप्रियता के कारण पत्नी का पूरा श्रृगांर करवाने के बाद ही यह क्रिया करता है। पत्नी को यह नित नये रूप में देखना पसन्द करता है। इस राशि के जातक का मन बड़ा रसिक होता है। प्रेमपत्र लिखने में सबसे ज्यादा आलस्य दिखलाते हैं। बड़ी मुश्किल से लिखते हैं। लिखाई की भाषा बड़ी रहस्यपूर्ण होती है, शेरो-शायरी का भरपूर प्रयोग होता है। अश्लीलता के चलते अपनी पत्नी को अश्लीलतम पत्र भी लिख देते हैं। पैरों में ज्यादा बल होने के कारण यह पैदल चलने से नहीं थकते। निवास जल में होने के कारण इनका मैथुन ठंडा होता है। तत्त्व पृथ्वी होने से यह व्यवहारिक होते हैं। स्वभाव इनका रहस्यमय होता है। इनका दाम्पत्य जीवन देख कर पता नहीं लगाया जा सकता की ये सुखी हैं या दुःखी।सन्तान इनके कम होती है। प्रेम सम्बन्ध कम होते हैं। रूढ़ियां और सामाजिक परम्परा तोड़ नहीं सकते। धर्मभीरू और अंधविश्वासी होते हैं। इस कारण प्रेम करने से डरते भी हैं और दिल से कमजोर होते हैं।इनके दाम्पत्य जीवन में आर्थिक समस्याएं अपने-आप सुलझ जाया करती हैं। जनवरी-फरवरी (माघ) गर्भाधान का समय होता है तथा शिशिर में यह थोड़ा कामातुर हो जाया करते हैं। रात का समय बेहद प्रिय है। 40 साल की उमर के पश्चात् सम्भोग में रूचि कम हो जाया करती हैं।साधारण तौर पर इस राशि के जातक सेक्स के मामले में ठंड़े होते हैं, दाम्पत्य जीवन विशेष चहल-पहल वाला नहीं होता। चतुराई के साथ अपना काम बना लेते हैं। इस राशि की महिलाएं बहुत बातुनी होती हैं और जबान पर नियन्त्रण नहीं होता है। शान-घमंड नहीं होता है और अपनी गलती स्वयं स्वीकार कर लेती हैं। स्वभाव लगभग सौम्य होता है। इस राशि की महिला प्रायः एक-दो सन्तान के पश्चात् अपनी वास्तविक उम्र से अधिक की लगने लग जाती है। उसका शरीर जल्दी ढल जाता है। इस राशि की महिला को एकांत पसन्द है। दिन में आलस्य और रात्रि में अत्यन्त फुर्ती होती है। इस राशि के जातक सन्तान के प्रति लापरवाह होते हैं। इनका पत्नी प्रेम घटता-बढ़ता रहता है। मैथुन के समय बात करते रहने की आदत होती है। प्रायः गुप्त रोग हो जाते हैं, जिन्हें अपनी लापरवाही से बढ़ा लेते हैं। इस राशि का पुरूष निम्नस्तरीय महिलाओं में विशेष रूचि रखता है। नौकरानी, मेहरी, मजदूर, आदि स्त्रियों में रूचि रहती है। यह हमेशा अपना पौरूष बढ़ाना चाहता है और सब ठीक रहने पर भी नाना प्रकार से ऐसे चक्कर में पड़ा रहता है। कामवर्धक दवाएं इसे सबसे ज्यादा प्रिय होती है। इसके साथ-साथ रात में इसको नग्नावस्था में ही सोने की आदत होती है। इस राशि की पत्नी इसके प्रभाव में रहती है और इसके भयानक क्रोध से बेहद डरती है। कुल मिलाकर इसका सैक्स विकृत होता है।

राशि और सैक्स - वृश्चिक राशि

राशि और सैक्स - वृश्चिक राशि
Sign & Sex - Scorpio
यह मेष राशि की सहोदर है। इसका आकार बिच्छू के समान है। स्थिर राशि, तत्त्व जल, शीर्षोदय उदय, दिशा पश्चिम, लिंग स्त्री, जाति ब्राह्मण, निवास छेद या बिल, योनि कीट, शरीर में स्थान गुप्तांग (योनि, इन्द्रिय, नितम्ब, गुदा), रंग काला तथा ग्रह स्वामी मंगल है।शरीर में स्थान गुप्तांग होने के कारण पुरूषों की इन्द्रिय दीर्घ और बिच्छू के समान डंक मारने वाली होती है। इस राशि का पुरूष हमेशा बिच्छू जैसी पीड़ा देने के समान अपना मैथुन शुरू कर देता है। स्त्री के साथ यह कब क्रीड़ा प्रारम्भ कर दे कहा नहीं जा सकता। प्रथम प्रवेश में स्त्री को लगता है, मानो बिच्छू डंक मार गया और वह तिलमिला जाया करती है। एक प्रकार से अपना हर सम्भोग यह बलात्कार से शुरू करता है। इस राशि की महिला भी ऐसा ही व्यवहार ज्यादातर पसन्द करती है। स्त्री अंग काफी दीर्घ होता है। अक्षत योनि होने के बावजूद सम्भोग की आदी-सी लगती है। इस राशि की स्त्रियों के स्तनों के चूचक (स्तनाग्र) गौर वर्ण के बावजूद अत्यन्त काले, कठोर होते हैं और नितम्ब भारी होते हैं।इसका निवास स्थान स्वयं गुप्तांग (योनि, इन्द्रिय, नितम्ब, गुदा) है, इस कारण इन्हीं क्षेत्रों में इनकी उत्तेजना का भी निवास है। इन्हीं अंगों को सहलाने या चुम्बन आदि से इनको उत्तेजना मिलती है। कीट राशि होने से बिल्कुल घुटन-भरे वातावरण में मैथुन प्रिय है तथा निम्न स्तरीय मैथुन अच्छा लगता है। योनि कीट होने के कारण इसे नंगी जमीन विशेष प्रिय होती है। स्वभाव नर है, अस्थिर रूप से मैथुन करते हैं। पश्चिम की ओर मुख करने में ज्यादा सुख मिलता है। जाति ब्राह्मण है, किन्तु गन्दगी प्रिय है। इस राशि के जातकों में कामुकता अधिक होती है। इस राशि के पुरूषों की कामना बहुत जहरीली होती है। प्रायः टाँगे उठाकर काफी देर तक क्रियारत रहते हैं। इस राशि के पुरूष का मैथुन कर्क, मकर, कुंभ या सिंह राशि की महिला ही झेल सकती है, किन्तु अन्य राशि की महिला को बराबर इस राशि के पुरूष के मैथुन से कष्ट होगा। इस राशि की स्त्री की वासना शान्त होने में काफी समय लगता है। इस राशि की महिला कन्या राशि के पुरूष के पल्ले पड़ गयी तो कन्या राशि का पुरूष पनाह मांगेगा। स्त्री को खड़े-खड़े होकर की जाने वाली कामलीला में ज्यादातर रूचि रहती है। इस राशि के जातक देर तक पीड़ादायक मैथुन करते हैं और देर तक लिपटे रहेंगे। मैथुन से पुर्व इस राशि के जातक को अपने पति-पत्नी के गुप्तांगों से खेलने का शौक होता है तथा दर्पण में या ऐसे आसनों में जिनमें अंगों की क्रिया दिखलाई पड़े, इनको बड़ा आनन्द आता है। एक-दूसरे के गुप्तांगों की क्रिया देखकर मैथुन करना इस राशि का स्वभाव होता है तथा ध्वनियां बराबर करते रहते हैं। इनको लोकलाज का भय नहीं होता। उल्टा चलने से बिच्छू स्वभाव के कारण इस राशि का जातक विपरीत रति में बड़ा सुख पाता है और सबसे प्रिय आसन मानता है। लाल कपड़ों से भी इनको बड़ी उत्तेजना मिलती है। इस राशि का पुरूष प्रायः मासिक धर्म या गर्भावस्था में भी अपनी पत्नी को नहीं छोड़ता है। इस राशि के जातक में समलैंगिक मैथुन की भी तीव्र भावना रहती है। कुल मिलाकर प्रचण्ड संभोग के साथ अपना दाम्पत्य जीवन पूरा करते हैं। तत्त्व जल तथा योनि कीट होने से स्खलन बहुत होता है। इस राशि की महिला का मासिक धर्म भी सबसे अधिक रक्त स्त्राव करता है। पुरूष में पूर्ण पौरूष तथा स्त्री में पूर्ण स्त्रीत्व होता है। मार्गशीर्ष (नवम्बर-दिसम्बर) में इस राशि के जातकों की कामुकता बढ़ जाती है। गर्भाधान होता है या प्रसव होता है। इस राशि का स्वभाव अत्यन्त उग्र होता है तथा व्यंग्य बाण चलाने (डंक मारने, ताना देने) में बड़ी कुशल होती है। इनके व्यंग्य बाणों से श्रोता तिलमिला जाता है। घोर अवसरवादी मौका पड़ने पर हाथ जोड़ने वाला, काम निकल जाने पर जूता मारने वाला, परले दर्जे का स्वार्थी होता है। वैसे इस राशि की स्त्री जितनी सुन्दर होगी, वह उतनी ही ‘बिच्छू’ (व्यंग्य कसने वाली) होगी। इसके व्यंग्य से मर्माहत होकर पति प्रायः मारपीट करते हैं, हत्या कर देते हैं या स्वयं आत्महत्या कर लेते हैं अथवा तलाक दे देते हैं। सबके साथ ऐसा ही बिच्छू जैसा व्यवहार होता है। कामलीला के समय भी ऐसा व्यंग्य कस देंगी कि मनुष्य छटपटा जाता है। पुरूष का स्वभाव भी इसी प्रकार का होता है। स्त्रियां पैर ज्यादा उठाकर चलती हैं तथा सोते समय पैर सिकोड़कर बिच्छू के समान आकार में सोती हैं।पुरूष अधिकतर परस्त्रीगामी होते है, कब किस परिवार की विवाहिता पर हाथ फेरकर डंक मार दें, पता नहीं चलता। जाति ब्राह्मण होने से अपने से कुलीन से सम्बन्ध बनाते हैं। संकरे स्थान, बिल या छेद के स्थान इसे बहुत ही पसन्द हैं। इस राषि की स्त्रियां भी विवाहित पुरूष में विशेष रूचि रखती हैं। पुरूष सुन्दर स्त्रियों को सब राज बता देते हैं। इनका दाम्पत्य जीवन अत्यन्त कलहपूर्ण होता है। विवाह शीघ्र करते हैं। अंधाधुंध सन्तान उत्पन्न करते हैं और उनकी ओर से लापरवाह होते हैं। प्रायः फुसफुसाकर बात करना इनकी आदत होती है। इनके प्रेम-पत्र व्यंग्यात्मक होते हैं। प्रेम इनका अस्थायी होता है, डंक मारा और चल दिये। स्त्रियां सावधानी से सम्बन्ध बनाती हैं। अपयश बहुत कम सामने आता है। अधिकांश शुभ ग्रह प्रभाव से सच्चरित्र होती है, पर व्यंग्य बाण इनके चरित्र को संदेहास्पद बना देता है। इनका रहन-सहन कीट योनि होने के कारण साफ-सफाई वाला नहीं होता, न ही बनाव-श्रृगांर में रूचि रखते हैं।

राशि और सैक्स - मिथुन राशि

राशि और सैक्स - मिथुन राशि
Sign & Sex - Gemini
इस राशि का ग्रह बुध माना गया है। अधिपति देवता विष्णु है। लिंग पुरूष है। राषि उभयोदय है, तत्व आकाश, स्वभाव द्विस्वभाव, रंग हरा, निवास गांव या शयन कक्ष आकार त्रिभुज, दिशा दक्षिण पूर्व है। ऋतु शरद रत्न पन्ना प्रकृत्ति पित्त स्वाद अम्ल और मिश्रित रक्त और वीर्य धातु मूत्र मिश्र संज्जक है। वेद अथर्ववेद जाति वैश्य है। खगोल विज्ञान के अनुसार बुध को सूर्य का निकटतम ग्रह माना गया है। तापमान 770 डिग्री फारेनहाइट है। इसकी परिक्रमा गति सबसे तेज है। इस ग्रह पर पृथ्वी से 8 गुना अधिक धूप पड़ती है। इस राशि का जो खंड सौरमण्डल में है, उसमें ऐसा प्रतीत होता है, मानो एक आकृति वीणावादन कर रही है और दूसरी उसे ध्यान से सुन रही है। उक्त गुणों से ही इस राशि के जातकों का विवाह और दाम्पत्य जीवन और सैक्स का पता लग जाता है। मेष और वृष राशि की भांति इनका विवाह शीघ्र हो जाता है, किन्तु इस राशि के पुरूषों में स्त्रीत्व अधिक और स्त्रियों में पुरूषत्व अधिक होता है। अधिकांश के दाढ़ी-मूंछ होते ही नहीं या वहां पर केवल रोम होते हैं। इस राशि के पुरूष ही प्रायः हिंजड़ा बनता है। पुरूषेन्द्रिय प्रायः अशक्त, लघु, पतली तथा सामान्य लम्बी होती है। स्त्री अंग त्रिकोण के समान होता है, नीचे से संकरा और ऊपर की ओर शनैः-शनैः बढ़ता जाता है। स्तन भी प्रायः त्रिभुजाकार होते हैं। इनका शरीर सामान्यतः सन्तुलित होता है। स्त्री की आंखों में लालिमा अधिक होती है। इस राशि की स्त्रियों में ही पुरूष की अपेक्षा आठ गुना अधिक कामाग्नि होती है। इनका विवाहित जीवन प्रचण्ड कामतुष्टि के साथ साथ हमेशा वाद-विवादमय रहता है। इस राशि का उत्तेजना केन्द्र गले और बांहों में कहीं भी हो सकता है। बांहें सहलाने, दबाने, या पकड़ने से इनको सुख मिलता है और उत्तेजित होते हैं। द्विस्वभाव के कारण एक बात पर टिक नहीं पाते हैं। इस राशि के जातक का मैथुन अत्यन्त चंचल है। मैथुन के दौरान पल-पल स्थिति बदलते रहते हैं। उभयोदय राशि के कारण एक दिशा से नहीं, उपदिशा, उलट पलट मैथुन इनका स्वभाव होता है। दिवा-रात्री बली होने के कारण दिन-रात कभी भी इनको मैथुन से सुख ही मिलता है। शयनकक्ष में बिस्तर जरूरी है। यह कुछ-न-कुछ बिछा जरूर लेते हैं। नंगी पृथ्वी पर मैथुन करना पसन्द नहीं है। इनकी कामवासना मेष-वृषभ से ज्यादा होती है। दक्षिण-पूर्व दिशा में मुख करके सम्भोग करने से अपने सुख को बढ़ा सकते हैं। इस राशि का जातक मौन मिथुन नहीं करता। (आकृति गुण) इसके मैथुन में नाना प्रकार की ध्वनियों, सीत्कारें, थपथपाहट होती है ताकि राशि गुण (शयनकक्ष, गांव) होने से (गांव वाले दूसरे लोग भी सुन लें) प्रभाव पड़ता है। व्यर्थ ध्वनियां बेहद करते हैं, जो सरलता से सुनायी पड़ जाती है। प्रारम्भिक क्रिया के दौरान, अन्त में इनका प्रेमालाप, प्रेम क्रियाएं चलती रहती है। निवास शयनकक्ष, गाँव होने से यह शयनकक्ष में या कहीं भी मैथुन कर सकता है। इनको इस बात की चिन्ता नहीं होती है कि कोई देख रहा है। इसके लिये लोकलाज नहीं के बराबर होती है। यह अपनी प्रेमिका / प्रेमी, पत्नी / पति से बहुत प्यार करते हैं और बड़ी भावुकता के साथ प्यार करते हैं। जल्दी छोड़ते नहीं हैं। मैथुन प्रेमालाप के समय के मध्य आंसू, मुस्कान का मेल बराबर होता है। अभी आंसू बहाया, अगले पल मुस्कराया; इनको सन्तोष नहीं होता। यह विवाह के प्रारम्भिक दिनों में रात-दिन मिलाकर चार-पाँच-सात बार भोग कर डालते हैं। सबके देखते देखते दरवाजा बंद कर क्रिया शुरू कर देंगे। इनको यह अहसास नहीं होता कि परिवार के अन्य सदस्य क्या सोच रहे होंगे। निर्लज्जता इनके मैथुन का गुण है।तत्त्व आकाश है, कल्पनायें ज्यादा करते हैं। जाति वैश्य होने से सैक्स में भी सौदेबाजी करते हैं, पहले यह करो, तब इच्छा पूर्ति होगी- इनकी साधारण आदत होती है। जब भी कोई नयी वस्तु पत्नी / प्रेमिका को देंगे, उतने ही मूल्य का, ज्यादा कीमती होने पर कठोर और देर तक, कम कीमती होने पर कुछ देर, साधारण मैथुन अवश्य करेंगे। उसी दिन अपना मूल्य वसूल लेंगे, छोड़ने वाले नहीं हैं। वेश्यागामी होने पर पूरी कीमत उसके शरीर से वसूल लेंगे।इनकी गति तेज होती हैं। मैथुन भी तेजी से करना कराना पसन्द करते हैं। इस राशि की स्त्रियां जून-जुलाई माह में विशेष रूप से गर्भवती होती है। रंग हरा होने के कारण यह सावन के अंधे की तरह हर जगह हरियाली ही देखते हैं। इस कारण प्रायः इनका प्रेम असफल रहता है। कल्पना खूब कर लेते हैं, हाथ नहीं लगा पाते। निवास शयन कक्ष है। अतएव रसिक बातें खूब करते है और मैथुन चर्चा में बड़ा आनन्द पाते हैं।इस राशि का दाम्पत्य जीवन कहा सुनी से भरा होने के बाद भी निभ जाता है। क्षण में माशा क्षण में तोला। इस राषि की स्त्रियां अत्यन्त भावुक होती है। इस राशि के जातकों के गुप्त सम्बन्ध प्रायः प्रकट हो जाते हैं। इनके प्रेम पत्र अत्यन्त लम्बे और खूब भावुकता पूर्ण होते हैं। प्रेमपत्रों में मैथुन-चर्चा अवश्य लिखते हैं। ‘तुम्हें बहुत-बहुत प्यार’ के स्थान पर ‘चुम्बन’ लिखना और संभोग की बातें करना जरूर रहता है।सन्तान के प्रति इनका व्यवहार बड़ा भावुकता पूर्ण होता है। उनको अनुशासन में नहीं रख पाते और प्रायः लाड़-प्यार में बिगाड़ दिया करते हैं। इनको सन्तान कम होती है। गुप्त रोग कम होते हैं। यह गर्भ के दिन पूरे होने पर भी संभोग करने से नहीं मानते हैं। प्रेम में अपनी भावुकता के कारण घर से भागना, आत्महत्या करना, परिवार की नेक सलाह को ठुकराना इनकी विषेषता है। इस राशि के जातकों का चरित्र प्रायः संदिग्ध दृष्टि से समाज में देखा जाता है।काफी उमर तक यह भोगी होते हैं। इस राशि की स्त्रियों का मासिक धर्म 48/52 के आसपास तक सक्रिय होता है। पुरूष 60/65 तक क्रियाशील रहता है। प्रायः इस राशि की महिला अपने पति को अपना उत्तेजना केन्द्र बतला देती है। आमतौर पर इसका दाम्पत्य जीवन सुखद होता है, पर कामुकता के कारण दूसरा पक्ष यदा-कदा बहुत घबरा जाता है और कलह की गुंजाइश हो जाती है। इस राशि के जातक की सन्तान भी ज्यादा होती है।

राशि और सैक्स - मेष राशि

राशि और सैक्स - मेष राशि
Sign & Sex- Aries
इस राशि के पुरूष की इन्द्रिय भेड़ के समान होती है। स्त्री अंग आंवले के आकार का होता है। इस राशि की महिलाओं का चेहरा अधिक लम्बोतरा होता है। इसके स्तन भेड़ के खुर के समान फैले चकले होते हैं। उनमें उठान नहीं होता है। कमर अधिकतर स्थुल होती है।
पुरूष ज्यादातर लम्बे-चौड़े, स्वस्थ होते हैं। इनका विवाह प्रायः शीघ्र हो जाता है। यह रूक रूक कर समागम करते हैं, प्रायः पुरूष होते हैं। स्वभाव में उग्रता के कारण दाम्पत्य जीवन में कलह, मारपीट प्रायः कर डालते हैं। इसके बावजूद भी इनका दाम्पत्य जीवन सुखी रहता है। परिवार का ध्यान रखते हैं। पत्नी का साथ निभाते हैं, पर सौन्दर्य प्रेमी और स्त्रियों को आकर्षित करने की क्षमता के कारण प्रायः अवैध सम्बन्ध बनाये रखते हैं। इस राशि की स्त्रियों को यदि नियन्त्रण में नहीं रखा जाये तो प्रायः पथ-भ्रष्ट हो जाती हैं। सौन्दर्य प्रियता और कला के प्रति इनके रूझान होने के कारण इनको सरलता से बहकाया जा सकता है। अधिक देर तक मैथुन इनको अच्छा लगता है। इस राशि के स्त्री पुरूष प्रेम प्रसंग प्रायः गोपनीय रखते हैं।
पृष्ठोदय राशि के कारण पीठ पीछे इनके दाम्पत्य जीवन और प्रेम प्रसंगों की लोग चर्चा करते हैं, किन्तु सामने कोई नहीं कहता। फिर यह भी गुप्त रूप से कार्य करते हैं। सतर्कता प्यारी होती है। इस राशि के जातक प्रेमपत्र बड़ी संयत और सतर्क भाषा में लिखे होते हैं। अवसर आने पर प्रेमपत्र प्रमाणित नहीं भी हो सकते हैं। प्रायः अपने इच्छित स्त्री-पुरूष से इनका प्रेम सम्बन्ध बन जाया करता है। प्रेम के मामले में ईर्ष्यालु भी होते हैं। प्रेम सम्बन्धी प्रकरणों में यह हिंसक भी हो सकते हैं। पृष्ठोदय राशि एवं गुणचार होने के कारण इनको पृष्ठ भाग से किया गया मैथुन प्रिय होता है। रात्रिबली राशि होने के कारण रात में ही मैथुन सुख अच्छा लगता है। दिन के समय किया गया मैथुन इसको अप्रिय हाता है। उसमें यह रस नहीं लेते।
चर राशि होने से यह चलायमान अर्थात् चंचल होते हैं। इस राशि की स्त्री को शरीर आघातों द्वारा या कंधे पकड़कर, निरन्तर स्तन मंथन करके हिलाते रहना चाहिये। इस राशि के पुरूष को भी इसी प्रकार की लीला में सुख मिलता है। इसी गुण के (चर) कारण इनका प्रेम किसी एक पर स्थिर नहीं रहता। इस राशि का निवास वन है अतः इसे सर्वथा एकान्त चाहिये। घर में कोई जागता रहे, भले ही न देख सके पर उसे इसका आभास होगा तो मन खट्टा हो जायेगा।जाति क्षत्रिय होने के कारण ‘लड़ाकु’ मैथुन प्रिय होता है। अपने सम्पूर्ण हथियारों के साथ एक-दूसरे पर हमला करना इनका विशेष गुण है। चतुष्पद राशि होने के कारण पशु आसन या पृष्ठ भाग से किया गया मैथुन अच्छा लगता है तथा तृप्ति अनुभव करते हैं। तत्व अग्नि होने के कारण काम दम्य रहते हैं तथा पसीना बहुत आता है। मंगल में जल है अतः यह ‘गीले’ बहुत होते हैं अर्थात् क्षण में कामोत्तेजित हो जाते हैं और इनका स्खलन अधिक मात्रा में होता है। कृतिका नक्षत्र का केवल प्रथम चरण (अ) होने के कारण इनका मैथुन कर्म बहुत कम विकृत होता हैं। प्रायः शुचिता का ध्यान रखते हैं। अश्विनी और भरणी के पूरे चारों चरण होने के कारण कुशलतापुर्वक और दृढ़ता के साथ मैथुन कर्म करते हैं।
ग्रह अधिपति गणपति (गणेश) के कारण बड़ी ही चतुराई से कामसुख भोगते हैं। धातु मज्जा होने के कारण इस राशि के पुरूष स्त्री को गर्भवती शीघ्र बनाते हैं। उसमें शुक्राणु अधिक होते हैं। इस राशि का ललाट पर अधिकार होने से उत्तेजना केन्द्र ललाट है, वैसे इस स्त्री को ललाट के अलावा अन्य स्थान (पलक, कपोल, होंठ, नाक, कान, बाल, भौहें आदि) पर भी हो सकते हैं, किन्तु चेहरे से नीचे नहीं। इस राशि की स्त्रियां यदि दशा अनुकूल हो तो प्रायः ग्रीष्म-ऋतु (वैषाख; अप्रेल-मई) में गर्भवती होती हैं। इसकी ऋतु ग्रीष्म है, अतः इस मौसम में इनमें वासना की मात्रा अधिक होती है। प्रायः गर्भाधान व प्रसव का इस राशि की स्त्री का यही समय है।इस राशि की स्त्री के केश, रोम अगर शरीर पर हुए तो बहुत मुलायम होते हैं। आकृति भेड़ होने के कारण स्त्री की त्वचा सुचिक्कण होती है और क्रिया के समय भेड़ के समान सीधेपन का व्यवहार करती है। इस राशि की महिला को सम्भोग के समय धूम्रपान करना अच्छा नहीं लगता और न ही धूम्रपान करना पसन्द करती है। इस राशि के जातक का इन्द्रियज्ञान नैत्र है, अतएव आँखों ही आँखों में यह बहुत कुछ कह डालते हैं। जिह्वा के बदले आँखों से अधिक काम लेते हैं। राशि की उच्चता के कारण अपने से अधिक श्रेष्ठ स्त्री-पुरूष की ओर विशेष झुकाव रखते हैं। आकार ढोल होने के कारण इस राशि की महिलाओं के नितम्ब बड़े होते हैं तथा पुरूषों की प्रायः तोंद निकल आती है। उमर के साथ कामुकता बढ़ती जाती है।इस राशि के जातक दोनों अश्लील वार्ता कम करते हैं और गम्भीरता ओढ़े रखते हैं। मैथुन से पूर्व, मैथुन के दौरान या उपरान्त किसी प्रकार के विकृत शब्द नहीं निकालते, इनकी क्रिया सित्कारहीन होती है, ध्वनी नहीं करते हैं। बन्द कमरे के बाहर कान लगाकर सुनना चाहें तो उसको आभास भी नहीं हो सकता है कि अन्दर क्या हो रहा है। इस क्रिया के पूर्व आलिंगन-चुम्बन भी प्रायः काम-चलाऊ ही करते हैं। समाप्ति पर चुपचाप हट जाते हैं, फिर कुछ ऐसा व्यवहार हो जाता है कि इस बात का अनुमान करना कठिन है कि अभी कुछ हुआ है। यह एकदम सामान्य हो जाते हैं।इस राशि की महिलाओं का मासिक धर्म 50 की उमर के बाद तक भी जारी रह सकता है। उन्हें प्रदर रोग आदि कम ही होते हैं। गुप्त रोग या यौन रोग प्रायः इनको नहीं होता।सन्तानों से बड़ा प्यार करते है, अनुशासन इनको प्रिय होता है। फूहड़ हंसी-मजाक इनको अच्छे नहीं लगते, किन्तु पेशाबघरों, सार्वजनिक स्थानों, रेल के डिब्बों, सैलानी स्थानों आदि पर यह गंदे शब्द और चित्र बड़ी तेजी से लिख बना देते हैं, यह इनका विशेष स्वभाव होता है। इस राशि की महिलाओं को अधिक शब्द सुनकर कान बन्द कर लेने की आदत होती है, किन्तु होठों पर मुस्कान होती है।

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